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Hindi Full =link= — Palitana 5 Chaityavandan In

पालीताणा, जिसे शत्रुंजय तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यहाँ पर हज़ारों वर्षों से अनगिनत संतों और साधुओं ने तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया है। इस पवित्र पर्वत की चोटी पर स्थित मुख्य मंदिर प्रथम तीर्थंकर भगवान को समर्पित है, जहाँ श्रद्धालु अनेकों सुंदर मंदिरों के दर्शन करते हैं। यहाँ की पहाड़ियों पर संगमरमर से निर्मित 1300 से अधिक मंदिर स्थित हैं, और कहा जाता है कि यहाँ पर 20 करोड़ से अधिक साधुओं सहित अन्य आत्माओं ने मुक्ति प्राप्त की है।

शीतल छाया रायण तणी, परम शांतिनो वास;जिहां बेसी प्रभु ध्यान धरे, प्रकटे दिव्य प्रकाश।प्रथम जिनेश्वर ऋषभदेव, पादपद्म ज्यां स्थाप्या;नवाणु वारना फेरमां, प्रभुये दर्शन आप्या।

| क्रम | स्थान | आध्यात्मिक लाभ | |------|--------|------------------| | 1 | मूलनायक | क्रोध का नाश | | 2 | कुमारपाल टेक | मान (अहंकार) का नाश | | 3 | आनंदसागर | माया (छल) का नाश | | 4 | भक्ति भवन | लोभ का नाश | | 5 | मोक्ष टेक | | palitana 5 chaityavandan in hindi full

श्री शत्रुंजय सिद्धक्षेत्र, दीठे दुर्गति वारे;भाव धरी ने जे चढे, तेने भव पार उतारे।अनंत सिद्धनो आहे ठाम, सकल तीर्थनो राय;पूर्व नवाणु ऋषभदेव, ज्यां ठाविया प्रभु पाय।

यह चैत्यवंदन भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर (मुख्य शिष्य) पुंडरीक स्वामी को समर्पित है, जिन्हें शत्रुंजय पर्वत पर ही मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। परम शांतिनो वास

प्रभु को झुककर वंदन करना।

पर्वत की चढ़ाई के दौरान या मुख्य मंदिरों के मार्ग में आने वाले शांतिनाथ भगवान के स्थान पर यह चैत्यवंदन किया जाता है。 नवाणु वारना फेरमां

(इसके बाद विधिपूर्वक आवश्यक सूत्र, स्तवन और काउसग्ग करें।)

प्रत्येक चैत्यवंदन करते समय इस क्रम का पालन करना चाहिए:

2. शांतिनाथ भगवान चैत्यवंदन (दूसरा पड़ाव)

नीचे इन 5 चैत्यवंदनों का पूर्ण विवरण और विधि दी गई है: